Start-up India Registration, Eligibility, Tax Benefits और फंडिंग
परिचय
Start up India भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसे नए उद्यमियों और इनोवेटिव बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया।
इस योजना का मुख्य मकसद देश में स्टार्टअप कल्चर को मजबूत करना, रोजगार पैदा करना और भारत को ग्लोबल इनोवेशन हब बनाना है।
अगर आप अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो Start up India के तहत DPIIT Recognition लेकर कई सरकारी फायदे उठा सकते हैं।
इस कम्पलीट गाइड में हम Start up India की Registration प्रक्रिया, Eligibility शर्तें, Tax Benefits-
फंडिंग के तरीके और जरूरी दस्तावेजों की पूरी जानकारी देंगे। पोस्ट को अंत तक पढ़ें ताकि कोई भी स्टेप मिस न हो।
DPIIT मान्यता के लिए Start up India के आधिकारिक पोर्टलपर रजिस्टर करें।
DPIIT मान्यता के लिए Start up India के आधिकारिक पोर्टल पर रजिस्टर करें।
Start-up India योजना क्या है
भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है जिसे 16 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉन्च किया था. इस योजना का मुख्य मकसद देश में नए स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना, इनोवेशन को सपोर्ट करना और युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके बनाना है।

Start up India योजना की शुरुआत 16 जनवरी 2016 को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा की गई थी। यह योजना उद्योग संवर्धन-
और आंतरिक व्यापार विभाग DPIIT के अंतर्गत चलाई जाती है। Start up India का विजन है कि देश के युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनाया जाए।
इस योजना के तहत सरकार स्टार्टअप्स को फंडिंग, इन्क्यूबेशन, इंडस्ट्री कनेक्शन, टैक्स छूट और कम्प्लायंस में आसानी जैसे कई फायदे देती है।
DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप को Start up India पोर्टल पर लिस्ट किया जाता है। इसके बाद वे सभी योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं।
Start-up India केवल टेक्नोलॉजी कंपनी के लिए नहीं है। मैन्युफैक्चरिंग, एग्रीकल्चर, हेल्थकेयर, एजुकेशन, फिनटेक, क्लीन एनर्जी जैसे हर सेक्टर का इनोवेटिव-
आइडिया इसमें शामिल हो सकता है। शर्त सिर्फ यह है कि आपके प्रोडक्ट या सर्विस में इनोवेशन, डेवलपमेंट या इम्प्रूवमेंट होना चाहिए।
Start-up India के मुख्य उद्देश्य
Start up India योजना के तीन बड़े उद्देश्य हैं जिनके लिए सरकार काम कर रही है-
पहला उद्देश्य है: सरलीकरण और हैंडहोल्डिंग। सरकार ने स्टार्टअप के लिए कम्प्लायंस बोझ कम कर दिया है। सेल्फ सर्टिफिकेशन, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और फास्ट ट्रैक पेटेंट जैसी सुविधाएं दी गई हैं।
2nd उद्देश्य है: फंडिंग सपोर्ट और इंसेंटिव देना। सरकार ने 10000 करोड़ का Fund of Funds बनाया है। इसके अलावा Seed Fund Scheme, Credit Guarantee Scheme और इनकम टैक्स छूट भी दी जाती है।
3rd उद्देश्य है: इंडस्ट्री और एकेडमिया पार्टनरशिप। Start up India के तहत इन्क्यूबेटर्स, एक्सेलेरेटर, रिसर्च पार्क और कॉर्पोरेट के साथ टाईअप करके स्टार्टअप को मेंटरशिप और मार्केट एक्सेस दिया जाता है।
Start-up India के 7 बड़े फायदे
DPIIT से रजिस्टर्ड स्टार्टअप को लगातार 3 साल तक इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता. इससे शुरुआती सालों में बिजनेस पर फाइनेंशियल लोड कम होता है।

इससे आप अपने स्टार्टअप शुरुआती सालों में प्रॉफिट को दोबारा बिजनेस में लगा सकते हैं।
1- इनकम टैक्स में 3 साल की छूट: DPIIT मान्यता प्राप्त Start up India इकाई को इनकॉरपोरेशन के बाद लगातार 3 साल तक इनकम टैक्स में 100 प्रतिशत की छूट मिलती है।
यह छूट सेक्शन 80 IAC के तहत दी जाती है। इससे स्टार्टअप अपने शुरुआती सालों में प्रॉफिट को दोबारा बिजनेस में लगा सकते हैं।
2- एंजेल टैक्स से छूट: Start up India को सेक्शन 56 2 VIIB के तहत एंजेल टैक्स से छूट दी गई है। अगर कोई मान्यता प्राप्त स्टार्टअप फेयर मार्केट वैल्यू से ऊपर निवेश लेता है-
तो उस पर टैक्स नहीं लगेगा। यह छूट 25 करोड़ रुपये तक के निवेश पर मिलती है।
3- सरकारी टेंडर में प्राथमिकता: Start up India के तहत रजिस्टर्ड कंपनियों को Government e Marketplace GeM और अन्य सरकारी टेंडर में प्राथमिकता मिलती है।
उनके लिए पहले का अनुभव और टर्नओवर की शर्तों में छूट दी गई है। इससे नए स्टार्टअप भी बड़े सरकारी प्रोजेक्ट के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
4- पेटेंट और ट्रेडमार्क: फीस में 80 प्रतिशत छूट, Start up India के तहत पेटेंट फाइल करने पर सरकारी फीस में 80 प्रतिशत की छूट मिलती है।
ट्रेडमार्क फीस में भी 50 प्रतिशत की छूट दी जाती है। साथ ही पेटेंट एप्लीकेशन को फास्ट ट्रैक मोड में प्रोसेस किया जाता है।
5- सेल्फ सर्टिफिकेशन की सुविधा: DPIIT मान्यता प्राप्त स्टार्टअप को 6 श्रम कानूनों और 3 पर्यावरण कानूनों के तहत सेल्फ सर्टिफिकेशन की सुविधा मिलती है।
इनकॉरपोरेशन के 5 साल तक कोई भी लेबर इंस्पेक्शन नहीं होगा जब तक कि कोई लिखित शिकायत न मिले।
6- फंड ऑफ फंड्स के जरिए फंडिंग: सरकार ने सिडबी के माध्यम से 10000 करोड़ का Fund of Funds for Startups बनाया है।
यह फंड सीधे स्टार्टअप में निवेश नहीं करता बल्कि SEBI रजिस्टर्ड वेंचर फंड्स में निवेश करता है। वे VC फंड्स आगे Start-up India इकाइयों में पैसा लगाते हैं।
7- विंडिंग अप प्रक्रिया 90 दिन में: अगर कोई Start up India बंद करना चाहता है तो उसके लिए फास्ट ट्रैक एग्जिट का प्रावधान है।
इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत स्टार्टअप को 90 दिन के अंदर बंद किया जा सकता है। सामान्य कंपनी के लिए यह प्रक्रिया 180 दिन की होती है।
स्टार्ट-अप इंडिया स्कीम (DPIIT मान्यता) के तहत पात्रता मानदंड
DPIIT मान्यता के लिए आपकी कंपनी 10 साल से नई होनी चाहिए, टर्नओवर 100 करोड़ से कम हो और बिजनेस इनोवेटिव या टेक्नोलॉजी बेस्ड होना जरूरी है।

Start up India का लाभ लेने के लिए आपकी इकाई को निम्नलिखित Eligibility शर्तें पूरी करनी होंगी-
1- इकाई का प्रकार: आपकी कंपनी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी होनी चाहिए जो कंपनी अधिनियम 2013 के तहत बनी हो। या फिर लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप LLP होनी चाहिए।
जो LLP अधिनियम 2008 के तहत बनी हो। रजिस्टर्ड पार्टनरशिप फर्म भी लायबिलिटी रखती है।
2- कंपनी की आयु: इकाई के इनकॉरपोरेशन या रजिस्ट्रेशन की तारीख से 10 साल से अधिक नहीं हुए होने चाहिए। 10 साल से पुरानी कंपनी Start up India के लिए अप्लाई नहीं कर सकती।
3- वार्षिक टर्नओवर: किसी भी वित्तीय वर्ष में इकाई का टर्नओवर 100 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए। अगर टर्नओवर 100 करोड़ पार कर जाता है तो वह इकाई Start up India का दर्जा खो देगी।
4- इनोवेटिव बिजनेस: इकाई का काम इनोवेशन, डेवलपमेंट या मौजूदा प्रोडक्ट सर्विस के इम्प्रूवमेंट से जुड़ा होना चाहिए।
या फिर उसमें रोजगार पैदा करने या धन सृजन की क्षमता होनी चाहिए। सिर्फ किसी मौजूदा बिजनेस को बांटकर नई कंपनी बनाने से Eligibility नहीं मिलेगी।
5- ओरिजिनल इकाई: कंपनी किसी मौजूदा बिजनेस को तोड़कर या रीकंस्ट्रक्ट करके नहीं बनाई गई होनी चाहिए। यह एकदम नई इकाई होनी चाहिए।
Start-up India रजिस्ट्रेशन प्रोसेस स्टेप बाय स्टेप
Start up India में DPIIT Recognition लेने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। कोई भी फीस नहीं लगती। नीचे Step-by-Step प्रोसेस दिया गया है:
स्टेप 1: अपनी कंपनी को इनकॉरपोरेट करें, सबसे पहले अपनी कंपनी को MCA पोर्टल पर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या LLP के रूप में रजिस्टर करें।
इनकॉरपोरेशन सर्टिफिकेट मिलना जरूरी है। पार्टनरशिप फर्म की दशा में रजिस्ट्रार ऑफ फर्म्स से रजिस्ट्रेशन कराएं।
स्टेप 2: Start up India पोर्टल पर प्रोफाइल बनाएं-http://www.startupindia.gov.in वेबसाइट पर जाएं।
ऊपर दाएं कोने में Register बटन पर क्लिक करें। अपनी डिटेल डालकर प्रोफाइल बनाएं। ईमेल और मोबाइल OTP से वेरिफाई करें।
स्टेप 3: DPIIT Recognition (Department for Promotion of Industry and Internal) Trade के लिए अप्लाई करें
लॉगिन करने के बाद डैशबोर्ड पर Get Recognised बटन दिखेगा। उस पर क्लिक करें। फॉर्म खुलेगा जिसमें इकाई की जानकारी भरनी है।
स्टेप 4: जरूरी जानकारी भरें, फॉर्म में कंपनी का नाम, इनकॉरपोरेशन नंबर, तारीख, पता, डायरेक्टर की डिटेल, बिजनेस सेक्टर, और इनोवेशन की जानकारी देनी होती है।
आपको 500 शब्दों में बताना होगा कि आपका स्टार्टअप कैसे इनोवेटिव है और स्केलेबल है।
स्टेप 5: दस्तावेज अपलोड करें, निम्नलिखित दस्तावेज PDF फॉर्मेट में अपलोड करें-
1- इनकॉरपोरेशन सर्टिफिकेट या LLP रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट।
2- PAN कार्ड।
3- वेबसाइट लिंक या पिच डेक।
4- डायरेक्टर या पार्टनर की डिटेल।
5- इनोवेशन का प्रूफ जैसे पेटेंट, अवार्ड, फंडिंग लेटर। यह ऑप्शनल है लेकिन अप्रूवल जल्दी मिलता है।
स्टेप 6: सेल्फ डिक्लेरेशन सबमिट करें, सभी जानकारी भरने के बाद सेल्फ डिक्लेरेशन पर टिक करें और फॉर्म सबमिट कर दें। सबमिट करते ही आपको एक रिकॉग्निशन नंबर मिल जाएगा।
स्टेप 7: सर्टिफिकेट डाउनलोड करें, DPIIT टीम आपके एप्लीकेशन की जांच करेगी। अगर सब कुछ सही है तो 2 से 7 दिन के अंदर DPIIT Recognition Certificate जारी हो जाएगा।
आप इसे डैशबोर्ड से डाउनलोड कर सकते हैं। इस सर्टिफिकेट पर एक यूनिक नंबर होता है जो सभी Start-up India फायदों के लिए काम आता है।
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के लिए जरूरी Documents
Start up India Registration के समय ये दस्तावेज तैयार रखें-
1- इनकॉरपोरेशन सर्टिफिकेट: MCA से मिला कंपनी या LLP का सर्टिफिकेट।
2- मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन: MOA और आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन AOA प्राइवेट लिमिटेड के लिए। LLP एग्रीमेंट LLP के लिए।
3- PAN कार्ड: कंपनी का PAN कार्ड।
4- डिटेल: ऑथराइज्ड रिप्रेजेंटेटिव की डिटेल और आधार कार्ड।
5- कंपनी की वेबसाइट: वेबसाइट या प्रोडक्ट का वीडियो लिंक।
6- पिच डेक या बिजनेस प्लान: बिजनेस प्लान PDF में। इसमें प्रॉब्लम, सॉल्यूशन, मार्केट साइज, रेवेन्यू मॉडल जरूर हो।
7- इनोवेशन का सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट: Start up India जैसे पेटेंट एप्लीकेशन, ग्रांट लेटर, अवार्ड सर्टिफिकेट, मीडिया कवरेज। यह अनिवार्य नहीं है लेकिन प्रोफाइल मजबूत करता है।
8- बैलेंस शीट और ITR: पिछले 3 साल की ऑडिटेड बैलेंस शीट और ITR, नई कंपनी है तो यह जरूरी नहीं।
Start-up India फंडिंग कैसे मिलती है
Start up India खुद सीधे फंड नहीं देता। यह एक इकोसिस्टम बनाता है जहां से फंडिंग मिल सके। फंडिंग के मुख्य 4 रास्ते हैं-
1- निधियों का कोष for Startup FFS: Pool of funds यह 10000 करोड़ का फंड है जिसे सिडबी मैनेज करता है। सिडबी इस पैसे को वेंचर कैपिटल फंड्स में निवेश करता है।
फिर वे VC फंड्स Start up India मान्यता प्राप्त कंपनियों में पैसा लगाते हैं। आपको डायरेक्ट अप्लाई नहीं करना है बल्कि उन VC से संपर्क करना है जिनमें सिडबी ने निवेश किया है।
2- Startup India सीड फंड स्कीम SISFS: Start up India शुरुआती स्टेज के स्टार्टअप के लिए सरकार ने 945 करोड़ की सीड फंड स्कीम शुरू की।
इसके तहत इन्क्यूबेटर्स के माध्यम से आइडिया स्टेज या प्रोटोटाइप स्टेज के स्टार्टअप- को 20 लाख रुपये तक का ग्रांट-
और 50 लाख तक का कन्वर्टिबल डिबेंचर मिल सकता है। अप्लाई करने के लिए Start-up India पोर्टल पर SISFS सेक्शन में जाएं।
3- स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट गारंटी योजना:(सीजीएसएस) Credit Guarantee Scheme for Startups CGSS, इस योजना के तहत बैंक और NBFC से लिए गए लोन पर 10 करोड़ रुपये तक की क्रेडिट गारंटी मिलती है।
अगर स्टार्टअप लोन नहीं चुका पाता तो सरकार 75 प्रतिशत तक का पैसा बैंक को देती है। इससे बैंक स्टार्टअप को आसानी से लोन देते हैं।
4- प्राइवेट इन्वेस्टर नेटवर्क: Start up India पोर्टल पर 200 से ज्यादा VC फर्म, एंजेल नेटवर्क और इन्क्यूबेटर लिस्टेड हैं।
DPIIT Recognition के बाद आप सीधे इन इन्वेस्टर को अपना पिच डेक भेज सकते हैं। सरकार समय पर स्टार्टअप इंडिया इन्वेस्टर कनेक्ट प्रोग्राम भी चलाती है।
Start up India के तहत इनकम टैक्स छूट की प्रक्रिया
Start up India के तहत सेक्शन 80 IAC छूट-
1- 3 साल की टैक्स छूट: Start up India टैक्स छूट लेने के लिए DPIIT Recognition के बाद अलग से फॉर्म 1 भरना होता है। यह फॉर्म Start-up India पोर्टल पर ही मिलता है।
CBDT इस फॉर्म को अप्रूव करता है, अप्रूवल के बाद आप लगातार 3 साल तक टैक्स छूट क्लेम कर सकते हैं। यह 3 साल पहले 10 साल के अंदर कभी भी ले सकते हैं।
सेक्शन 56 2 VIIB एंजेल टैक्स छूट: इस छूट के लिए भी DPIIT पोर्टल पर अलग से अप्लाई करना होता है। आपको डिक्लेरेशन देनी होती है कि आप कोई लोन या एडवांस नहीं देंगे-
और कुछ खास एसेट नहीं खरीदेंगे। अप्रूवल मिलने के बाद 25 करोड़ तक के निवेश पर एंजेल टैक्स नहीं लगेगा।
Start up India से जुड़ी गलतफहमियां
1- गलतफहमी: Start up India रजिस्ट्रेशन के बाद सीधे पैसा मिल जाएगा।
सच्चाई: Start up India फंडिंग की गारंटी नहीं देता। यह सिर्फ इकोसिस्टम देता है। फंडिंग के लिए आपको VC या बैंक को अप्रोच करना होगा।
2- गलतफहमी: कोई भी बिजनेस स्टार्टअप बन सकता है।
सच्चाई: सिर्फ इनोवेटिव और स्केलेबल बिजनेस ही Eligibility रखते हैं। ट्रेडिंग, रिटेल शॉप, कोचिंग सेंटर को आमतौर पर अप्रूवल नहीं मिलता जब तक उसमें टेक्नोलॉजी इनोवेशन न हो।
3- गलतफहमी: एक बार DPIIT मिल गया तो हमेशा के लिए है।
सच्चाई: अगर आपका टर्नओवर 100 करोड़ पार कर गया या कंपनी 10 साल पुरानी हो गई तो DPIIT Recognition स्वतः खत्म हो जाता है।
Start up India के लिए बिजनेस आइडिया
अगर आप सोच रहे हैं कि कौन सा स्टार्टअप शुरू करें तो ये सेक्टर Start-up India में अच्छा स्कोप रखते हैं-
1- एग्रीटेक: Start up India किसानों के लिए IoT बेस्ड सॉल्यूशन, सप्लाई चेन प्लेटफॉर्म।
2- हेल्थटेक: Start up India के लिए टेलीमेडिसिन, AI बेस्ड डायग्नोसिस, हेल्थ रिकॉर्ड ऐप।
3- क्लीनटेक: सोलर प्रोडक्ट, EV चार्जिंग, वेस्ट मैनेजमेंट।
4- एडटेक: Start up India के लिए स्किल डेवलपमेंट, वर्नाकुलर लर्निंग प्लेटफॉर्म।
5- डीप टेक: Start up India के लिए AI, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन, ड्रोन टेक्नोलॉजी।
6- D2C ब्रांड: इनोवेटिव प्रोडक्ट के साथ डायरेक्ट टू कस्टमर मॉडल।
Start-up India Registration रिजेक्ट क्यों होता है
Start up India के लिए DPIIT कई बार एप्लीकेशन रिजेक्ट कर देता है। मुख्य कारण ये हैं:
1- इनोवेशन का प्रूफ न देना: आपने 500 शब्द में इनोवेशन ठीक से नहीं बताया।
2- अधूरा दस्तावेज: MOA, PAN या पिच डेक अपलोड नहीं किया।
3- गलत बिजनेस सेक्टर: आपने ट्रेडिंग या कंसल्टिंग चुना जो आमतौर पर एलिजिबल नहीं है।
4- कंपनी : कंपनी क्या 10 साल से पुरानी है।
5- बिजनेस को तोड़कर बनाई: कंपनी किसी मौजूदा बिजनेस को तोड़कर बनाई गई है।
नोट: रिजेक्शन के बाद आप 3 महीने बाद दोबारा अप्लाई कर सकते हैं। इस बार इनोवेशन वाले पॉइंट को अच्छे से लिखें और सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट लगाएं।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना: निशुल्क प्रशिक्षण, 8000 रुपये वजीफा पाएं।
Start up India हेल्पलाइन और सपोर्ट
Start up India में अगर Registration में कोई दिक्कत आती है तो आप इन जगह संपर्क कर सकते हैं-
1- टोल फ्री नंबर: 1800 115 565
2-ईमेल: dipp-startups@nic.in
3- Start-up India हब: पोर्टल पर Contact Us सेक्शन में जाकर क्वेरी डाल सकते हैं।
4- सोशल मीडिया: Twitter पर @startupindia हैंडल टैग करके सवाल पूछ सकते हैं।
नोट: हर राज्य में स्टार्टअप नोडल ऑफिसर भी होता है। उसकी डिटेल Start up India पोर्टल पर स्टेट पॉलिसी सेक्शन में मिल जाएगी।
Start up India Application रिजेक्ट होने से कैसे बचें
DPIIT (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) हर साल 40% से ज्यादा एप्लीकेशन सिर्फ छोटी गलतियों की वजह से रिजेक्ट कर देता है।
अगर ये 6 बातें ध्यान रखोगे तो 99% चांस है कि पहला ही अप्लाई अप्रूव हो जाएगा।
इनोवेशन वाले 500 शब्द को हल्के में मत लेना, DPIIT टीम सबसे पहले यही सेक्शन पढ़ती है। यहाँ गलती = सीधा रिजेक्शन।
क्या करें
1- प्रॉब्लम बताओ: Start up India में मार्केट में कौन सी दिक्कत है जो आप सॉल्व कर रहे हो? डेटा के साथ लिखो।
2- सॉल्यूशन यूनिक कैसे है: आपके प्रोडक्ट में ऐसा क्या है जो दूसरों के पास नहीं? पेटेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस मॉडल मेंशन करो।
3- इम्पैक्ट दिखाओ: इससे कस्टमर का टाइम/पैसा कैसे बचेगा? रोजगार कितने बनेंगे?
4- प्रचलित शब्द: प्रचलित शब्द (Buzzwords)।
AI-Based, Revolutionary लिखने से कुछ नहीं होगा। प्रूफ दो। स्क्रीनशॉट, डेमो लिंक, कस्टमर टेस्टिमोनियल अटैच करो।
5- गलत उदाहरण: हमारा ऐप AI से यूजर को बेस्ट डील देता है।
6- सही उदाहरण: हमारा AI एल्गोरिदम 10 ई-कॉमर्स साइट का रियल टाइम प्राइस ट्रैक करके यूजर को 22% तक बचत कराता है। 3000 बीटा यूजर पर टेस्टेड।
7- सारे दस्तावेज पहले से रेडी रखो: Start up India में अधूरे डॉक्यूमेंट = 7 दिन में रिजेक्ट।
8- चेकलिस्ट: 1- Incorporation Certificate:
2- MCA से मिला PDF।
3- PAN Card।
कंपनी के नाम पर बना हुआ।
वेबसाइट या पिच डेक Website/Pitch Deck
Start up India में लाइव वेबसाइट का लिंक या 10 स्लाइड का PDF। Under Construction वाली साइट मत देना।
1- वीडियो का लिंक।
2- मिनट का प्रोडक्ट डेमो YouTube पर। Unlisted डालकर लिंक दो। ये गेम चेंजर है।
3-: प्राधिकार पत्र अगर CA/CS अप्लाई कर रहा है तो।
4- सही बिजनेस कैटेगरी और सेक्टर चुनो, गलत सेक्टर चुनने पर DPIIT मान लेता है कि आपको खुद क्लियर नहीं है।
क्या करें
1- Start up India पोर्टल पर 50+ इंडस्ट्री हैं। अपने प्रोडक्ट से सबसे करीबी वाला चुनो।
2- अगर आप Fintech- अगर आप फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी हो तो IT Services मत चुनना।
3- डिस्क्रिप्शन में कीवर्ड डालो- AgriTech, HealthTech, EdTech। इससे टीम को समझने में आसानी होती है।
4- वेबसाइट और सोशल मीडिया
एक्टिव रखो, DPIIT टीम आपकी वेबसाइट जरूर चेक करती है।
क्या करें: 1- वेबसाइट लाइव होनी चाहिए, Coming Soon पर न हो।
2- About Us, Contact Us, Product पेज क्लियर हो।
3- LinkedIn/Instagram पेज पर 4-5 पोस्ट डाल दो। एक्टिव लगना चाहिए।
4- वेबसाइट पर कंपनी का नाम, CIN नंबर, एड्रेस मेंशन हो।
5- Eligibility Criteria दोबारा चेक करो, बेसिक गलती पर भी रिजेक्ट होते हैं।
फाइनल चेक: 1- कंपनी 10 साल से पुरानी तो नहीं?
2- टर्नओवर 100 करोड़ से कम है?
3- LLP या Pvt Ltd ही है? प्रोपराइटरशिप नहीं चलेगी।
4- कंपनी का काम Innovation से जुड़ा है? सिर्फ ट्रेडिंग वाली फर्म रिजेक्ट हो जाती है।
5- रिजेक्ट होने पर घबराओ मत, अपील करो, पहली बार में रिजेक्ट हो जाए तो 3 महीने बाद फिर से अप्लाई कर सकते हो।
प्रो टिप: Start up India रिजेक्शन मेल में कारण लिखा होता है। उसी गलती को सुधारो और Additional Information वाले बॉक्स में लिखो:
पिछले अप्लाई में बताई गई कमी को हमने सुधार लिया है। अब हमने प्रोडक्ट का डेमो वीडियो भी जोड़ा है।
बोनस टिप: सुबह 10 से 12 के बीच अप्लाई करो। DPIIT टीम फ्रेश होती है तो अप्रूवल जल्दी आता है। शाम को किए अप्लाई अक्सर पेंडिंग में चले जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ
सवाल 1: Start-up India Registration की फीस कितनी है?
जवाब: Start-up India में DPIIT Recognition के लिए सरकार कोई फीस नहीं लेती। पूरी प्रक्रिया निशुल्क है।
अगर कोई एजेंट आपसे पैसे मांगता है तो सावधान रहें। आप खुद पोर्टल पर फ्री में अप्लाई कर सकते हैं।
सवाल 2: क्या प्रोपराइटरशिप फर्म Start-up India के लिए अप्लाई कर सकती है?
जवाब: नहीं। अभी Start-up India Eligibility सिर्फ प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, LLP और रजिस्टर्ड पार्टनरशिप फर्म के लिए है। प्रोपराइटरशिप और अनरजिस्टर्ड पार्टनरशिप को मान्यता नहीं मिलती।
सवाल 3: Start up India के लिए DPIIT Recognition मिलने में कितना समय लगता है?
जवाब: अगर सभी दस्तावेज सही हैं तो आमतौर पर 2 से 7 वर्किंग डे में सर्टिफिकेट जारी हो जाता है। कुछ केस में DPIIT टीम क्लेरिफिकेशन मांग सकती है जिससे 15 दिन तक लग सकते हैं।
सवाल 4: क्या 10 साल पुरानी कंपनी Start-up India का फायदा ले सकती है?
जवाब: नहीं। Eligibility शर्त के अनुसार इनकॉरपोरेशन की तारीख से 10 साल के अंदर ही अप्लाई करना होता है। 10 साल पूरे होते ही DPIIT Recognition समाप्त हो जाता है।
सवाल 5: Start-up India और MSME Udyam Registration में क्या फर्क है?
जवाब: MSME रजिस्ट्रेशन मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की सभी छोटी इकाइयों के लिए है।
Start-up India सिर्फ इनोवेटिव और स्केलेबल बिजनेस के लिए है। एक कंपनी दोनों रजिस्ट्रेशन ले सकती है और दोनों के फायदे अलग अलग हैं।
सवाल 6: क्या विदेशी नागरिक Start-up India कंपनी में डायरेक्टर बन सकता है?
जवाब: हाँ। प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में विदेशी नागरिक डायरेक्टर बन सकता है। शर्त यह है कि कम से कम एक डायरेक्टर भारतीय निवासी होना चाहिए। कंपनी का रजिस्ट्रेशन भारत में होना जरूरी है।
सवाल 7: Start up India के लिए टैक्स छूट के लिए अलग से अप्लाई करना पड़ता है क्या?
जवाब: हाँ। DPIIT Recognition के बाद सेक्शन 80 IAC की 3 साल वाली टैक्स छूट के लिए फॉर्म 1 भरना होता है।
एंजेल टैक्स छूट के लिए भी अलग से डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होता है। दोनों फॉर्म Start-up India पोर्टल पर मिलते हैं।
सवाल 8: अगर मेरा Start-up India एप्लीकेशन रिजेक्ट हो जाए तो क्या करें?
जवाब: रिजेक्शन की वजह ईमेल में बताई जाती है। आप उस गलती को सुधार कर 3 महीने बाद दोबारा अप्लाई कर सकते हैं। दोबारा अप्लाई करते समय इनोवेशन और स्केलेबिलिटी को अच्छे से एक्सप्लेन करें।
सवाल 9: क्या Start-up India से लोन मिलता है?
जवाब: Start-up India खुद लोन नहीं देता। लेकिन Credit Guarantee Scheme के तहत 10 करोड़ तक के लोन पर गारंटी मिलती है।
इससे बैंक आसानी से लोन दे देते हैं। इसके अलावा सिडबी और अन्य बैंक स्टार्टअप के लिए स्पेशल लोन स्कीम चलाते हैं।
सवाल 10: DPIIT Recognition के बाद हर साल कोई रिपोर्ट भरनी होती है क्या?
जवाब: हाँ। DPIIT मान्यता प्राप्त स्टार्टअप को हर साल एक सिंपल एनुअल सेल्फ असेसमेंट फॉर्म भरना होता है।
इसमें टर्नओवर, एम्प्लॉई काउंट और फंडिंग की जानकारी देनी होती है। यह फॉर्म Start-up India डैशबोर्ड पर मिलता है।
निष्कर्ष
स्टार्ट अप इंडिया रजिस्ट्रेशन हर नए उद्यमी के लिए जरूरी है। डीपीआईआईटी मान्यता से टैक्स छूट, फंडिंग सपोर्ट और सरकारी लाभ मिलते हैं। अगर आपका आइडिया इनोवेटिव है तो आज ही रजिस्टर करें और अपने स्टार्टअप को नई उड़ान दें।
अस्वीकरण
1- स्टार्ट-अप इंडिया रजिस्ट्रेशन 2026 से संबंधित यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है।
2- इसमें दी गई जानकारी समय के साथ बदल सकती है। कृपया रजिस्ट्रेशन से पहले स्टार्ट-अप इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट startupindia.gov.in पर नवीनतम दिशानिर्देश जरूर देखें। यह लेख कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।
