जननी सुरक्षा योजना गर्भवती महिलाओं के लिए 1400 रुपये
परिचय
जननी सुरक्षा योजना भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है भारत में आज भी बहुत सी गर्भवती महिलाएं घर पर ही बच्चे को जन्म देती हैं-
घर पर डिलीवरी के दौरान साफ सफाई की कमी और डॉक्टर की गैर मौजूदगी के कारण कई बार माँ या बच्चे की जान को खतरा हो जाता है-
इसी समस्या को खत्म करने के लिए भारत सरकार ने साल 2005 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जननी सुरक्षा योजना की शुरुआत की थी। यह योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चलती है-
इस योजना का मुख्य मकसद है, कि हर गरीब गर्भवती महिला सरकारी अस्पताल में सुरक्षित माहौल में बच्चे को जन्म दे और उसे आर्थिक मदद भी मिले-
जननी सुरक्षा योजना पहले की तरह पूरे देश में चल रही है। उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों से लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों तक, हर जगह की BPL परिवार की महिलाओं को इसका फायदा मिल रहा है-
सरकार का लक्ष्य है, कि साल 2030 तक मातृ मृत्यु दर को 70 प्रति लाख से कम किया जाए और नवजात शिशु मृत्यु दर को भी कम किया जाए। जननी सुरक्षा योजना इसी बड़े लक्ष्य का एक अहम हिस्सा है-
अगर आप गर्भवती हैं या आपके घर में कोई महिला गर्भवती है तो यह लेख आपके बहुत काम आएगा। इसमें हम आपको बताएंगे कि जननी सुरक्षा योजना क्या है-
कितना पैसा मिलता है, कौन पात्र है, अप्लाई कैसे करना है, कौन से कागज लगेंगे और पैसा कब तक खाते में आता है। पूरा लेख ध्यान से पढ़ें ताकि कोई जानकारी छूट न जाए।
जरुरी बात: JSY (Janani Suraksha Yojana) से मिलने वाली राशि से आप डिलीवरी के बाद घर से काम शुरू करने के लिए स्वरोजगार योजना का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
जननी सुरक्षा योजना का मुख्य उद्देश्य
आइए जानते हैं, जननी सुरक्षा योजना के 3 मुख्य उद्देश्य, जो हर गर्भवती महिला और नवजात शिशु की जान बचाते हैं।

जननी सुरक्षा योजना को शुरू करने के पीछे सरकार की सोच बहुत साफ थी। भारत में साल 2005 से पहले मातृ मृत्यु दर यानी 1 लाख बच्चों के जन्म पर माताओं की मौत का आंकड़ा 301 था-
इसका सबसे बड़ा कारण था कि 60 प्रतिशत से ज्यादा डिलीवरी घर पर बिना किसी प्रशिक्षित डॉक्टर या नर्स के होती थी। घर पर दाई से डिलीवरी कराने में संक्रमण का खतरा, ज्यादा खून बहना और समय पर इलाज न मिलना जैसी समस्याएं आम थीं।
जननी सुरक्षा योजना का पहला उद्देश्य: संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना, संस्थागत प्रसव का मतलब है सरकारी अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या सरकार से मान्यता प्राप्त प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी कराना-
जब डिलीवरी अस्पताल में होती है तो डॉक्टर और नर्स तुरंत मौजूद रहते हैं। अगर डिलीवरी के दौरान कोई दिक्कत आती है, तो तुरंत ऑपरेशन या खून चढ़ाने की सुविधा मिल जाती है। इससे जच्चा और बच्चा दोनों की जान बच जाती है।
दूसरा बड़ा उद्देश्य: जननी सुरक्षा योजना में गरीब परिवारों पर आने वाले आर्थिक बोझ को कम करना। गांव में आज भी कई परिवार ऐसे हैं जो अस्पताल के खर्च के डर से घर पर ही डिलीवरी कराना पसंद करते हैं-
जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकार डिलीवरी के बाद महिला के बैंक खाते में सीधे पैसे भेजती है। ग्रामीण इलाके में 1400/- रुपये और शहरी इलाके में 1000/- रुपये की मदद दी जाती है-
यह रकम कम लग सकती है लेकिन BPL परिवार के लिए ये पैसे दवाई, आने जाने का किराया और खाने पीने में बहुत मदद करते हैं।
तीसरा उद्देश्य: ASHA कार्यकर्ताओं को मजबूत करना। ASHA यानी Accredited Social Health Activist गांव की ही एक महिला होती है जो स्वास्थ्य विभाग और गर्भवती महिलाओं के बीच की कड़ी का काम करती है-
जननी सुरक्षा योजना के तहत ASHA दीदी को हर गर्भवती महिला को अस्पताल तक लाने और उसकी देखभाल करने के लिए 300/- से 600/- रुपये तक का प्रोत्साहन मिलता है-
इससे ASHA कार्यकर्ता ज्यादा मन से काम करती हैं और गांव की हर गर्भवती महिला तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचती हैं। तथा प्रसव के बाद भी उसे अच्छी गाइड करती हैं
जननी सुरक्षा योजना में कितनी राशि मिलती है
जननी सुरक्षा योजना में मिलने वाली राशि आपके क्षेत्र पर निर्भर करती है, आइए जानते हैं पूरी जानकारी-

जननी सुरक्षा योजना की राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह राशि राज्य के प्रदर्शन और महिला के रहने के स्थान यानी ग्रामीण या शहरी के आधार पर तय होती है-
सरकार ने राज्यों को दो हिस्सों में बांटा है। एक हैं कम प्रदर्शन वाले राज्य जिन्हें LPS यानी Low Performing States कहते हैं। दूसरे हैं ज्यादा प्रदर्शन वाले राज्य जिन्हें HPS यानी High Performing States कहते हैं-
कम प्रदर्शन वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, असम, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड शामिल हैं-
इन राज्यों में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर बाकी राज्यों से ज्यादा थी, इसलिए यहां मदद की राशि भी ज्यादा रखी गई है। अगर आप इन 10 राज्यों में से किसी में रहते हैं-
और गांव में रहते हैं तो डिलीवरी के बाद आपको 1400/- रुपये मिलेंगे। अगर आप इन्हीं राज्यों के शहर में रहते हैं तो 1000/- रुपये मिलेंगे-
ज्यादा प्रदर्शन वाले राज्यों में बाकी के सभी राज्य आते हैं जैसे पंजाब, हरियाणा, केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक वगैरह। इन राज्यों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से बेहतर हैं-
इसलिए यहां मदद की राशि थोड़ी कम है, HPS (High performing State) राज्यों के ग्रामीण इलाके में रहने वाली महिला को 700/- रुपये और शहरी इलाके में रहने वाली महिला को 600/- रुपये दिए जाते हैं-
यह पैसा सिर्फ सरकारी अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या JSY से मान्यता प्राप्त प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी कराने पर ही मिलता है। अगर आप घर पर डिलीवरी कराते हैं तो इस योजना का पैसा नहीं मिलेगा-
हां, जननी सुरक्षा योजना में कुछ राज्यों में BPL परिवार की महिला को घर पर डिलीवरी की स्थिति में भी 500/- रुपये की मदद दी जाती है, लेकिन वो JSY (Janani Suraksha Yojana) का हिस्सा नहीं है, वो एक अलग स्कीम है-
पैसे सीधे लाभार्थी महिला के बैंक खाते में DBT यानी Direct Benefit Transfer के माध्यम से भेजे जाते हैं। इसलिए आपका बैंक खाता आधार कार्ड से लिंक होना बहुत जरूरी है-
साथ ही बैंक खाता महिला के नाम से ही होना चाहिए, पति या सास के खाते में JSY (Janani Suraksha Yojana) का पैसा नहीं आता है।
जननी सुरक्षा योजना के लिए पात्रता की शर्तें
जननी सुरक्षा योजना का लाभ केवल इन्हीं 6 शर्तों, को पूरा करने वाली गर्भवती महिलाओं को मिलता है।

जननी सुरक्षा योजना का लाभ हर गर्भवती महिला को नहीं मिलता है। इसके लिए सरकार ने कुछ पात्रता शर्तें रखी हैं-
पहली शर्त: महिला गरीबी रेखा से नीचे यानी BPL परिवार से होनी चाहिए। अगर आपके पास BPL राशन कार्ड है तो आप आसानी से पात्र हो जाएंगी।
दूसरी शर्त: जननी सुरक्षा योजना में SC या ST वर्ग की महिलाएं भी पात्र हैं, चाहे उनके पास BPL कार्ड हो या न हो। सरकार मानती है कि SC और ST समुदाय के लोगों की आर्थिक स्थिति अक्सर कमजोर होती है-
और उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी कम है। इसलिए इन वर्गों की सभी गर्भवती महिलाओं को JSY (Janani Suraksha Yojana) का लाभ दिया जाता है।
तीसरी शर्त: उम्र से जुड़ी है गर्भवती महिला की उम्र डिलीवरी के समय 19 साल या उससे ज्यादा होनी चाहिए। 19 साल से कम उम्र की लड़की की शादी कानूनन अपराध है-
और कम उम्र में गर्भधारण माँ और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक होता है। इसलिए 19 साल से कम उम्र की गर्भवती को इस योजना का लाभ नहीं मिलता।
चौथी शर्त: बच्चों की संख्या से जुड़ी है, जननी सुरक्षा योजना का लाभ सिर्फ पहले दो जीवित बच्चों के जन्म तक ही मिलता है,अगर आपके पहले से दो बच्चे हैं-
और आप तीसरी बार गर्भवती हैं तो आपको JSY का पैसा नहीं मिलेगा। सरकार दो बच्चों के नियम को बढ़ावा देती है ताकि जनसंख्या नियंत्रण में रहे।
पांचवी शर्त: जननी सुरक्षा योजना में डिलीवरी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में होनी चाहिए। जैसा हमने ऊपर बताया, घर पर हुई डिलीवरी पर JSY का पैसा नहीं मिलता-
आपको नजदीकी PHC, CHC, जिला अस्पताल या सरकार से सूचीबद्ध प्राइवेट अस्पताल में ही भर्ती होना पड़ेगा।
छठी शर्त: गर्भवती महिला का ASHA कार्यकर्ता के पास पंजीकरण होना चाहिए। गर्भ का पता चलते ही आपको गांव की ASHA दीदी से मिलना है-
वो आपका नाम, पता, आखिरी मासिक धर्म की तारीख और अनुमानित डिलीवरी की तारीख एक रजिस्टर में दर्ज करेगी-
इसी रजिस्टर को MCP कार्ड यानी Mother and Child Protection Card भी कहते हैं। इस कार्ड पर आपके सभी टीके और जांच की तारीख लिखी जाती है।
जननी सुरक्षा योजना में रजिस्ट्रेशन कैसे कराएं
जननी सुरक्षा योजना में रजिस्ट्रेशन के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं, ASHA दीदी घर आकर फ्री में फॉर्म भरती हैं और 7 दिन में JSY कार्ड देती हैं।
जननी सुरक्षा योजना में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बहुत आसान है, और इसका कोई शुल्क नहीं लगता है। इसके लिए आपको कहीं लंबी लाइन में लगने या दलाल के चक्कर में पड़ने की जरूरत नहीं है-
सबसे पहले जब आपको पता चले कि आप गर्भवती हैं तो तुरंत अपनी गांव की ASHA कार्यकर्ता से संपर्क करें। हर गांव में एक ASHA दीदी नियुक्त होती है। अगर आपको अपनी ASHA दीदी का पता नहीं है-
तो आप आंगनवाड़ी कार्यकर्ता या ANM दीदी से पूछ सकती हैं। ASHA दीदी आपके घर आकर आपका विवरण एक फॉर्म में भरेगी, इस फॉर्म को ही JSY कार्ड या MCP कार्ड कहा जाता है-
MCP कार्ड पर ASHA दीदी आपकी आखिरी पीरियड की तारीख पूछेगी और उसी के आधार पर आपकी डिलीवरी की संभावित तारीख निकालेगी-
इसके बाद वो आपको बताएगी कि आपको कब कब जांच के लिए आना है और कौन से टीके लगवाने हैं। कम से कम 3 बार ANC यानी Antenatal Checkup कराना जरूरी होता है-
जननी सुरक्षा योजना में पहली जांच गर्भ ठहरने के 3 महीने के अंदर, दूसरी जांच 6 महीने के आसपास और तीसरी जांच 8वें या 9वें महीने में होती है-
रजिस्ट्रेशन के समय ASHA दीदी आपसे कुछ दस्तावेज मांगेगी। इनमें आधार कार्ड, BPL राशन कार्ड या SC ST प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक की फोटो कॉपी और दो फोटो शामिल हैं-
अगर आपके पास BPL कार्ड नहीं है लेकिन आप SC या ST वर्ग से हैं तो जाति प्रमाण पत्र दिखाना होगा। बैंक पासबुक महिला के नाम से होनी चाहिए और उसमें IFSC कोड साफ साफ लिखा होना चाहिए-
जननी सुरक्षा योजना में एक बार रजिस्ट्रेशन हो जाने के बाद ASHA दीदी की जिम्मेदारी बन जाती है कि वो आपके पूरे गर्भ काल में आपका ध्यान रखे-
वो आपको हर टीके की तारीख याद दिलाएगी, आयरन की गोलियां देगी, वजन चेक करेगी और डिलीवरी के समय आपको अस्पताल तक लेकर जाएगी। अस्पताल में भर्ती-
से लेकर छुट्टी तक वो आपके साथ रहेगी। इसी काम के लिए उसे सरकार की तरफ से 600/- रुपये तक का भुगतान किया जाता है।
जननी सुरक्षा योजना के लिए जरूरी दस्तावेज
ASHA दीदी को ये 5 दस्तावेज जमा करें और पाएं 1400/- रुपये की सहायता राशि सीधे बैंक खाते में।
जननी सुरक्षा योजना का लाभ लेने के लिए आपके पास कुछ जरूरी कागज होने चाहिए। अगर एक भी दस्तावेज कम होगा तो ASHA दीदी या अस्पताल वाले आपका फॉर्म आगे नहीं बढ़ाएंगे-
इसलिए डिलीवरी से पहले ही ये सभी कागज तैयार करके एक फाइल में रख लें। सबसे पहले और सबसे जरूरी दस्तावेज निम्नलिखित हैं-
आधार कार्ड: आधार कार्ड महिला के नाम से होना चाहिए। अगर शादी के बाद सरनेम बदला है तो आधार में भी अपडेट करवा लें। आधार कार्ड के बिना DBT से पैसा खाते में नहीं आएगा क्योंकि सरकार आधार से ही पहचान करती है।
दूसरा जरूरी कागज: BPL (Below poor line) राशन कार्ड, अगर आप गरीबी रेखा से नीचे के परिवार से हैं तो आपके पास पीला या गुलाबी राशन कार्ड होगा-
उसी की फोटो कॉपी लगेगी, अगर BPL कार्ड नहीं है लेकिन आप SC या ST वर्ग से हैं तो जाति प्रमाण पत्र की फोटो कॉपी लगेगी। जाति प्रमाण पत्र तहसील से बना होना चाहिए।
तीसरा दस्तावेज: बैंक पासबुक, पासबुक महिला के नाम से होनी चाहिए। उस पर खाता नंबर, IFSC कोड और बैंक का नाम साफ साफ छपा होना चाहिए। ध्यान रखें कि पति, सास या किसी और के खाते में JSY का पैसा नहीं आता-
अगर आपका खाता नहीं है तो तुरंत जन धन योजना के तहत जीरो बैलेंस अकाउंट खुलवा लें। बैंक खाता आधार से लिंक और DBT (Direct benifit transfer) के लिए एक्टिव होना जरूरी है।
चौथा दस्तावेज: MCP (Mother and Child Protection Card) कार्ड यानी माँ और बच्चा सुरक्षा कार्ड। यह कार्ड ASHA दीदी ही बनाकर देती है जब आप पहली बार उससे मिलती हैं-
इस कार्ड पर आपके सभी टीके, वजन, खून की जांच और ANC (Antenatal Care) चेकअप की तारीख लिखी होती है। डिलीवरी के समय यह कार्ड अस्पताल में दिखाना पड़ता है।
पांचवा: महिला की दो पासपोर्ट साइज फोटो। फोटो नई होनी चाहिए। इसके अलावा अगर अस्पताल मांगे तो निवास प्रमाण पत्र या वोटर ID भी रख लें। कुछ राज्यों में JSSK कार्ड भी मांगा जाता है, जो अस्पताल में ही बन जाता है।
जननी सुरक्षा योजना का पैसा कब और कैसे मिलता है
जननी सुरक्षा योजना में बहुत सी महिलाओं का सवाल होता है कि जननी सुरक्षा योजना का पैसा डिलीवरी के कितने दिन बाद मिलता है। इसका जवाब है कि सरकार ने नियम बनाया है कि डिलीवरी के 7 दिन के अंदर पैसा लाभार्थी के खाते में आ जाना चाहिए-
लेकिन असल में थोड़ा समय लग सकता है। पैसा मिलने की पूरी प्रक्रिया समझिए। जब आप सरकारी अस्पताल में भर्ती होती हैं तो ASHA दीदी आपके साथ होती है-
डिलीवरी के बाद अस्पताल का स्टाफ एक डिस्चार्ज स्लिप बनाता है। इस स्लिप पर लिखा होता है कि डिलीवरी नॉर्मल हुई या ऑपरेशन से, बच्चा लड़का है या लड़की, और जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं-
इसके बाद ASHA दीदी और ANM मिलकर आपका JSY फॉर्म भरती हैं। इस फॉर्म पर आपका नाम, पति का नाम, आधार नंबर, बैंक खाता नंबर, डिस्चार्ज स्लिप नंबर और ASHA का नाम लिखा जाता है-
फॉर्म पर ASHA, ANM और डॉक्टर के साइन होते हैं। यह फॉर्म ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर के ऑफिस में जमा होता है। वहां से यह जिला स्वास्थ्य समिति के पास जाता है-
जिला स्तर पर सभी फॉर्म की जांच होती है कि कहीं कोई गलती तो नहीं है। जांच के बाद लिस्ट को बैंक में भेज दिया जाता है। बैंक PFMS पोर्टल के जरिए सीधे आपके खाते में पैसा भेज देता है-
आमतौर पर इस पूरी प्रक्रिया में 15 से 30 दिन लग जाते हैं। अगर आपके दस्तावेज सही हैं और बैंक खाता आधार से लिंक है तो 15 दिन में पैसा आ जाता है-
अगर खाता नंबर गलत है या आधार लिंक नहीं है तो पैसा अटक जाता है। इसलिए डिलीवरी से पहले ही बैंक जाकर आधार लिंक का स्टेटस चेक कर लें-
पैसा आने पर आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर SMS भी आता है। SMS में लिखा होता है कि PFMS से आपके खाते में JSY के तहत इतने रुपये क्रेडिट हुए हैं-
अगर 1 महीने बाद भी पैसा न आए तो अपनी ASHA दीदी से संपर्क करें। वो ब्लॉक ऑफिस में जाकर स्टेटस पता कर सकती है। और आपको स्पष्ट/साफ़ बता सकती है कितने दिन बाद आएगा।
जननी सुरक्षा योजना में ASHA कार्यकर्ता की भूमिका
जननी सुरक्षा योजना में ASHA दीदी गर्भावस्था के पहले दिन से लेकर डिलीवरी के बाद तक आपकी सगी बहन की तरह साथ निभाती हैं।
जननी सुरक्षा योजना की सफलता का पूरा श्रेय ASHA कार्यकर्ताओं को जाता है। ASHA यानी Accredited Social Health Activist गांव की ही एक पढ़ी लिखी महिला होती है जिसे स्वास्थ्य विभाग ट्रेनिंग देता है-
वो सरकार और गांव की गर्भवती महिलाओं के बीच की कड़ी होती है। ASHA दीदी का काम गर्भ का पता चलते ही शुरू हो जाता है। वो घर घर जाकर सर्वे करती है कि गांव में कौन सी महिला गर्भवती है-
पता चलते ही वो उस महिला का रजिस्ट्रेशन करती है और MCP कार्ड बनाती है। इसके बाद वो हर महीने गर्भवती के घर जाती है। गर्भावस्था के दौरान ASHA दीदी आपको ANC चेकअप के लिए PHC तक लेकर जाती है-
वो आपको आयरन फोलिक एसिड की लाल गोलियां देती है ताकि खून की कमी न हो। कैल्शियम की गोली भी देती है। हर महीने आपका वजन करती है और BP (Blood pressure) चेक करती है-
अगर खून की कमी या कोई और दिक्कत लगती है तो तुरंत डॉक्टर को बताती है। ASHA दीदी का सबसे जरूरी काम है कि डिलीवरी के समय आपको अस्पताल पहुंचाना होता है-
प्रसव पीड़ा शुरू होते ही वो 102 एंबुलेंस बुलाती है या किसी गाड़ी का इंतजाम करती है। पूरे रास्ते वो आपके साथ रहती है। अस्पताल में भर्ती से लेकर डिलीवरी तक वो बाहर इंतजार करती है-
जननी सुरक्षा योजना में डिस्चार्ज के बाद वो आपको सुरक्षित घर तक छोड़ती है। बच्चे के जन्म के बाद भी ASHA की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। वो 42 दिन तक आपके घर आती है-
नवजात बच्चे का वजन करती है, टीकाकरण की तारीख बताती है और स्तनपान के बारे में समझाती है। अगर माँ या बच्चे को कोई दिक्कत होती है तो तुरंत अस्पताल लेकर जाती है-
इस पूरे काम के लिए ASHA दीदी को सरकार प्रोत्साहन राशि देती है। ग्रामीण इलाके में अगर वो ANC कराती है, अस्पताल तक लाती है और प्रसव बाद विजिट करती है तो उसे 600/- रुपये मिलते हैं-
तथा शहरी इलाके में यह राशि 400/- रुपये है। अगर डिलीवरी कम प्रदर्शन वाले राज्य में हुई है तो ASHA को 600/- और ज्यादा प्रदर्शन वाले राज्य में 300/- रुपये मिलते हैं।
जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम और JSY में क्या अंतर
बहुत से लोग जननी सुरक्षा योजना और जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम को एक ही समझ लेते हैं। लेकिन ये दोनों अलग अलग स्कीम हैं-
दोनों का मकसद माँ और बच्चे को सुरक्षित रखना है लेकिन फायदे अलग हैं। जननी सुरक्षा योजना यानी JSY एक नकद सहायता योजना है-
इसमें डिलीवरी के बाद महिला के खाते में 600/- से 1400/- रुपये तक दिए जाते हैं। यह पैसा सिर्फ एक बार मिलता है। JSY का फोकस संस्थागत प्रसव को बढ़ाने पर है ताकि घर पर डिलीवरी बंद हो-
जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम यानी JSSK की शुरुआत साल 2011 में हुई थी। यह एक मुफ्त सेवा योजना है। इसमें नकद पैसा नहीं मिलता बल्कि डिलीवरी से जुड़ी सभी सेवाएं मुफ्त दी जाती हैं-
JSSK के तहत गर्भवती महिला को अस्पताल तक लाने के लिए मुफ्त एंबुलेंस, मुफ्त डिलीवरी, मुफ्त सीजेरियन ऑपरेशन, मुफ्त दवाई, मुफ्त खाना, मुफ्त खून और मुफ्त जांच की सुविधा मिलती है-
JSSK का फायदा सिर्फ माँ को ही नहीं बल्कि 1 साल तक के बीमार नवजात बच्चे को भी मिलता है। अगर बच्चा पैदा होने के बाद बीमार हो जाता है तो उसका इलाज, दवाई, जांच सब मुफ्त है-
बच्चे को अस्पताल तक लाने ले जाने के लिए भी मुफ्त एंबुलेंस मिलती है। सबसे बड़ी बात ये है कि JSSK (Janani Shishu Suraksha Karyakram) का लाभ लेने के लिए BPL कार्ड या जाति प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है-
हर गर्भवती महिला, चाहे वो किसी भी वर्ग से हो, अमीर हो या गरीब, JSSK की मुफ्त सेवाएं ले सकती है। वहीं JSY का पैसा सिर्फ BPL और SC ST महिलाओं को ही मिलता है-
इस तरह समझिए कि JSY आपको डिलीवरी के बाद पैसा देती हैऔर JSSK डिलीवरी के दौरान आपका एक भी रुपया खर्च नहीं होने देती-
एक गर्भवती महिला दोनों योजनाओं का फायदा एक साथ ले सकती है। अस्पताल में डिलीवरी कराने पर न तो खर्च लगेगा और न ही बाद में, सीधे 1400/- रुपये मिलेंगे।
जननी सुरक्षा योजना से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ
सवाल 1: क्या प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी कराने पर JSY का पैसा मिलेगा?
जवाब: हां, मिलेगा लेकिन सिर्फ उन प्राइवेट अस्पतालों में जो सरकार से मान्यता प्राप्त हैं और JSY के तहत सूचीबद्ध हैं। हर प्राइवेट अस्पताल में यह सुविधा नहीं है-
भर्ती से पहले अस्पताल से पूछ लें कि वो JSY के लिए अधिकृत हैं या नहीं। बड़े शहरों के नर्सिंग होम अक्सर सूचीबद्ध नहीं होते।
सवाल 2: जननी सुरक्षा योजना में अगर पहला बच्चा लड़का है तो क्या दूसरे बच्चे पर JSY का पैसा मिलेगा?
जवाब: हां, बिल्कुल मिलेगा। JSY में लड़का या लड़की का कोई भेदभाव नहीं है। पहले दो जीवित बच्चों तक पैसा मिलता है, चाहे दोनों लड़के हों या दोनों लड़कियां। तीसरे बच्चे पर पैसा नहीं मिलेगा।
सवाल 3: अगर घर पर अचानक डिलीवरी हो जाए तो क्या करें?
जवाब: अगर घर पर ही डिलीवरी हो गई तो तुरंत ASHA को बुलाएं। वो ANM को बुलाकर जच्चा बच्चा की जांच कराएगी। इसके बाद भी आपको 48 घंटे के अंदर अस्पताल ले जाना होगा-
अस्पताल में भर्ती होने पर आपको JSSK की मुफ्त सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन JSY का 1400/- रुपये वाला पैसा नहीं मिलेगा। कुछ राज्यों में घर पर डिलीवरी पर 500/- रुपये की अलग से मदद है।
सवाल 4: बैंक खाता पति के नाम पर है तो क्या JSY का पैसा आ जाएगा?
जवाब: नहीं, बिल्कुल नहीं आएगा। JSY का पैसा सिर्फ गर्भवती महिला के नाम वाले बैंक खाते में ही आता है। अगर आपके नाम से खाता नहीं है तो तुरंत खुलवा लें। जन धन खाता जीरो बैलेंस पर खुल जाता है।
सवाल 5: जननी सुरक्षा योजना में डिलीवरी के 2 महीने बाद भी पैसा नहीं आया तो कहां शिकायत करें?
जवाब: सबसे पहले अपनी ASHA दीदी से बात करें। वो ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर के ऑफिस में जाकर स्टेटस चेक करेगी। अगर वहां से भी जवाब न मिले तो आप 104 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकते हैं-
यह स्वास्थ्य विभाग का टोल फ्री नंबर है। इसके अलावा आप सीधे जिला CMO ऑफिस में भी लिखित शिकायत दे सकते हैं। तथा cpgram पोर्टल में भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं, यह आपका अधिकार है।
निष्कर्ष
1- जननी सुरक्षा योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं है, बल्कि देश की लाखों गरीब गर्भवती महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण है। इस योजना ने घर में होने वाली खतरनाक डिलीवरी को कम करके संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिया है।
2- अगर आप BPL, SC या ST परिवार से हैं और सरकारी अस्पताल में डिलीवरी कराती हैं तो आपको 600/- से 1400/- रुपये तक की आर्थिक मदद सीधे बैंक खाते में मिलती है।
3- साथ में JSSK यानी जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत डिलीवरी, दवाई, जांच, खाना और एंबुलेंस जैसी सभी सुविधाएं बिल्कुल मुफ्त मिलती हैं। ध्यान रखें कि योजना का लाभ लेने के लिए गर्भ का पता चलते ही ASHA दीदी से संपर्क करें।
4- कम से कम 3 ANC चेकअप कराएं, MCP कार्ड बनवाएं और डिलीवरी सरकारी अस्पताल में ही कराएं। आधार कार्ड और बैंक पासबुक अपने नाम से तैयार रखें।एक सुरक्षित माँ ही एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है।
5- जननी सुरक्षा योजना का मकसद यही है कि पैसों की कमी की वजह से किसी भी महिला की जान जोखिम में न पड़े। इसलिए इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा गर्भवती महिलाओं तक पहुंचाएं ताकि हर माँ और बच्चा सुरक्षित रहे।
6- जननी सुरक्षा योजना से मिलने वाली आर्थिक मदद और बेटी के जन्म के बाद आप बेटी के जन्म के बाद सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश करें ताकि उसकी पढ़ाई और शादी के लिए पैसा जुड़ सके।
अस्वीकरण
1- इस लेख में दी गई “जननी सुरक्षा योजना” से संबंधित सभी जानकारी केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है।
2- हमने पूरी कोशिश की है कि यहाँ दी गई जानकारी सही और अपडेट हो, लेकिन सरकारी योजनाओं के नियम, लाभ की राशि और पात्रता समय-समय पर बदल सकते हैं।
3- इसलिए आपसे निवेदन है: आधिकारिक पुष्टि जरूरी: योजना का लाभ लेने से पहले अपनी ASHA दीदी, ANM या नजदीकी सरकारी अस्पताल / PHC / CHC से संपर्क करके जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।
4- कोई कानूनी सलाह नहीं: यह लेख कोई कानूनी या मेडिकल सलाह नहीं है। गर्भावस्था से जुड़े किसी भी फैसले के लिए हमेशा डॉक्टर की सलाह लें।
5- सरकारी वेबसाइट देखें: सबसे सटीक और ताजा जानकारी के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट nhm.gov.in देखें।
6- इस वेबसाइट या लेख के लेखक किसी भी गलत जानकारी या इससे होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। योजना का लाभ सरकारी नियमों के अनुसार ही मिलेगा।
नोट: ब्लॉग में दिखाई गई तस्वीरें प्रतीकात्मक (Symbolic) हैं। जननी सुरक्षा योजना की सही जानकारी के लिए अपनी ASHA दीदी या नजदीकी सरकारी अस्पताल से संपर्क करें।

1400
धन्यवाद Deepa जी, कमेंट के लिए 🙏
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